जल के लिए जूझता टीकमगढ़


 ​जल के लिए जूझता टीकमगढ़


बुंदेलखंड तेरी अजब कहानी ना पेट को पानी ना खेत को पानी , ऐसा ही कुछ नजारा बुंदेलखंड के टीकमगढ़ जिले में देखने को मिल है।जहां गिरते जल स्तर ने इस साल करेला और नीम चढ़ा वाली कहावत चरितार्थ हो रही है ।नष्ट होते इस जिले के तालाबों के कारण एक तो जल स्तर पहले से नीचे हो रहा था उस पर इस बार के सूखे ने जीने का सुख भी छीन लिया । यही कारण है की जब फरवरी में स्वराज्य अभियान के योगेन्द्र यादव बुंदेलखंड के दौरे पर आये थे तो उन्हें कहना पड़ा कि बुंदेलखंड के हालात देख कर मुझे डर लगता है ।तालब , कुए सूख गए हेंड पम्प जबाब देने लगे हैं । पीने के पानी का बड़ा ही गंभीर संकट है । आज जब यहहालात हैं तो आने वाले समय में और क्या हालात होंगे । यदि सरकार ने पानी के लिए अभी से युद्ध स्तर पर प्रयास नहीं किये तो मराठवाड़ा जैसे हालात हो जाएंगे । पानी की कारण गाँव के गाँव खाली हो जाएंगे ।

योगेन्द्र यादव का डर अब बुंदेलखंड में सच साबित होने लगा है । गाँवों की विकराल जल समस्या के बाद अब शहरों की भी हालत बिगड़ने लगीहै ।टीकमगढ़ में पानी पर लगे बन्दूक धारियों के पहरे भी पानी को बचा नहीं पा रहे हैं । वहीँ दमोह नगर में फ़िल्टर प्लांट से टंकियों तक पहुँचने वाली मुख्य पाइप लाइन को छेद कर लोग पानी की चोरी करने को मजबूर हैं । पानी की इस चोरी के चलते दमोह नगर की पानी की टंकी सुबह से शाम तक नहीं भर पाती । दमोह के लोगों की चिंता अब इस बात को लेकर है की सागर से उधार का पानी कब तक उनकी प्यासबुझाएगा ?

 टेहरी से टीकमगढ़ बने इस नगर की लाख की आबादी की प्यास बुझाने के लिए नगर पालिका को खासी मसक्कत करना पड़ रही है ।उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले के जामनी बाँध से अपने हिस्से का पानी लेने के लिए कई तरह के जातन करने पड़े थे । जब पानी मिला और बरी घाटपहुंचा तो नगर पालिका के सामने उसकी सुरक्षा की चिंता हो गई । इसके आसपास के उत्तर प्रदेश के गाँव के लोग और किसान इस पानी को चुरानेलगे थे । मजबूर होकर पालिका अध्यक्ष ने जल की सुरक्षा के लिए सुरक्षा गार्ड तैनात कर दिए । पर हथियार बंद सुरक्षा गार्डो के बाद भी पानी कीरात में चोरी होती रही । नगर पालिका को जिस जल भण्डार से उम्मीद थी की यह पानी मई -जून तक चल जाएगा , वह अप्रैल में ही ख़त्म होगया । अब नगर पालिका ने इसी नदी पर एम पी और यू पी के जंगलों के बीच मढ़िया घाट पर एक कुंड खोजा है , लोगों की मान्यता है की इस कुंड मेंबड़ा जल भण्डार है, कुंड के इस पानी को लिफ्ट कर बरिघाट पहुंचाया जा रहा है , जिससे मई तक का काम चल जाएगा । इस कुंड पर भी सुरक्षा गार्डतैनात किये गए हैं ।

टीकमगढ़ नगर की एक लाख की आबादी को हर तीसरे दिन पानी मिल पा रहा है । दरअसल बुंदेलखंड के इस जिले में भी पिछलेदो वर्षो से औसत वर्षा १०००.१ मिमी की नहीं हुई है । इस बार अनियमित रूप से ५०५ मिमी वर्षा होने से स्थिती और विकराल हो गई । परिणामतह जिले का जल स्तर नीचे खिसक गया है । जिले में लगे 9312 हेंड पम्पो में से 8706 चालू बताये जा रहे हैं और 606 बंद बताये जा रहे हैं ।जमीनी हकीकत इससे कही अलग है । जिले पम्प दुरुस्त करने के लिए 45 दल गठित करने और को रोजाना 5 -5हेंड पम्प सुधारने का लक्ष्य दियागया है ।

ये दल और प्रशासन तंत्र किस तरह से जिले की जल की व्यवस्था दूर कर रहा है यह आये दिन ग्रामीणों द्वारा दिये जा रहे ज्ञापनों से हीसाफ़ हो जाता है । ज्योरामोर गाँव में सरकारी रिकार्ड में छ हेंड पम्प लगे हैं जो गांव की तीन हजार की आबादी को पानी केलिए पर्याप्त माने जा रहे हैं। पर गाँव में आज के हालात में सिर्फ एक हेंड पम्प ही पानी दे रहा है , यही इनका सहारा है । बल्देव गढ़ विकाश खण्ड के दुर्गापुर पंचायत का गाँव हैखेरा , इस गाँव में दो हेंड पम्प लगे थे , जो पानी भी दे रहे थे , पर पीएचई वाले एक साल पहले सुधार के नाम पर इसके पाइप निकाल ले गए , फिरअब तक नहीं लौटे । अपनी व्यथा कलेक्टर साहब को भी सुना चुके हैं ।

बल्देवगढ़ विकाश खण्ड की भेलशी गाँव में पिछले आठ वर्षो से नल जल योजना बंद पड़ी है । गाँव के 13 हजार की आबादी केसहारा बने हेंड पम्पो ने भी अब जबाब दे दिया है । पानी की जुगाड़ में गाँव के लोगों को दूर दराज तक भटकना पड़ता है । आठ साल से बंद नल जलयोजना की पाइप लाइन भी जगह जगह से खराब हो चुकी है । यह योजना १५ साल पहले शुरू हुई थी सात साल तो ठीक ठाक चली फिर ऐसी बंद हुईकी पूर्णतः बंद हो गई ।

जतारा जनपद पंचायत के ९३ गाँवों में से टी दर्जन से ज्यादा गाँवों में मुख्य्मंत्री नलजल योजना पूर्णतः ठप्प है । इन नलजल योजनाओं में अधिकाँश ईएसआई हैं जो सिर्फ बिजली कनेक्शन के कारण , और पम्प जलने के कारण बंद पड़ी हैं । इसी जनपद का एक 600 की आबादी बाला गाँव है टानगा जहाँ के लोग तालाब में गड्ढा खोद कर पिने के पानी जुगाड़ करते हैं । गाँव हेंड पम्पअधिकांशतः खराब ही रहता है । गाँव वालों ने तहसीलदार को ज्ञापन भी दिया था कुछ समय के लिए दशा सुधरी फिर जस के तस हालात हो गए ।

निवाड़ी के लोगों ने सी एम हेल्प लाइन में भी शिकायत की थी , यहां के लोगों को हफ्ते में एक बार पानी मिलता है । लोगों को रोजानानिजी टेंकर मालिकों से पानी खरीदने को मजबूर होना पड़ता है । यू पी की सीमा से लगा गाँव है तगेडी गाँव की नल जल योजना दो साल से बंद पड़ीहै , गाँव के चार में से दो हेंड पम्प खराब पड़े हैं । पिछले दिनों पानी की लेकर इस गाँव के बच्चों ने स्कूल जाना भी बंद कर दिया था ।

बड़ागांव धसान नगर पंचायत में पांच दिन में एक दिन पानी सप्लाई किया जाता है । 15 हजार की आबादी के इस कसबे में पिछले सालजल को लेकर बढ़ते संघर्ष के कारण टोकन से पानी की व्यवस्था शुरू की गई थी ।

वहीँ टीकमगढ़ जिले के चंदेरा में पुलिस पानी का परमार्थ करने में जुटी है । यहाँ के थाने में जब पुलिस वालों ने बोर कराया और उसमे अच्छा पानीनिकलने पर गाँव के लोगों को बाँटने का निर्णय लिया गया । यहां के थाना प्रभारी राकेश तिवारी बताते हैं की पानी को लेकर झगडे ना हो इसलिएलोगों के बर्तन रखवा लिए जाते हैं , उनमे पुलिस के जवान सुाबह सुबह पानी भर देते हैं ।

इस बुंदेलखडं की दाना -पानी की इस समस्या को स्वराज्य अभियान के संयोजक योगेन्द्र यादव ने प्रदेश से लेकर देश के हर मंच पर उठाया । जब कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई तो वे सुप्रीम कोर्ट जा पहुंचे । सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद सोती सरकारें भी अब जाग्रत हुई । बिकाऊ ख़बरों की तलाश में भटकने वाले राष्ट्रीय चैनलों को भी बुंदेलखंड की ख़बरें टी आरपी वाली नजर आने लगी । बिकाऊ ख़बरें जान कर कई राष्ट्रीय चैनलों ने अपने विशेष संवादाता और ओ बी वैन भेज कर खबरे बनवाई ।

पर इस दौर में लोगों ने यहां के जनप्रतिनिधि वर्ग को पूर्णतः निर्लिप्त भाव से तमाशा देखने वाला पाया । चाहे वे बुंदेलखंड इलाके के मंत्री पद पर विराजमान नेता भूपेंद्र सिंह हो अथवा सूखे के दौर में राई का नृत्य कराने वाले गोपाल भार्गव हों , जयंत मलैया ,कुसुम मेहदेले अथवा खुद उमा भारती ही क्यों ना हो । जो काम इन लोगों को करना चाहिए था वह एक बाहर का व्यक्ति योगेन्द्र यादव कर गया । नेताओ को शायद ये भरोषा है की जब सारी कायनात जल के लिए अपनी जान दे देगी तब भी उनके घरों में पानी का भण्डार रहेगा ।

By: रवींद्र व्यास

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