महोबा : ​'कल्पतरु वार्षिकोत्सव एवं सम्मान समारोह' सम्पन्न हुआ


महोबा : ​'कल्पतरु वार्षिकोत्सव एवं सम्मान समारोह' सम्पन्न हुआ


​​महोबा जिले के कबरई विकास खण्ड स्थित सिचौरा गाँव में ‘श्री दक्षिणेश्वर नवयुवक रामलीला कमेटी’ के तत्वावधान में ​​'कल्पतरु वार्षिकोत्सव एवं सम्मान समारोह' सम्पन्न हुआ | जिसके अंतर्गत दो दिवसीय रामलीला मंचन हुआ एवं गत रविवार शानदार अखिल भारतीय कवि सम्मेलन सम्पन्न हुआ | जिसमें राष्ट्रीय स्तर के कवियों एवं कवियत्रियों ने सिरकत की |

श्री कल्पतरु कवि सम्मेलन' का सुभारम्भ यति बाबा नरसिंहानंद सरस्वती ( राष्ट्रीय संयोजक अखिल भारतीय संत परिषद, महंत-प्रसिद्द चंडी पीठ एवं महादेव मंदिर डासना, गाजियाबाद, आयोजक- हिन्दू संसद) श्री सज्जनदास जी महाराज (उपाचार्य कबीर विज्ञान आश्रम, बड़इया, उ.प्र.) बाबा परमिंदर आर्य (कार्य वाहक अध्यक्ष- हिन्दू स्वाभिमान) व्यंग्य कवि राजेन्द्र राजा (दिल्ली) के कर कमलों से दीप प्रज्जवलन व माँ शारदे की प्रतिमा में माल्यार्पण के साथ हुई | युवा कवि अमित अमित शर्मा (ग्रेटर नोएडा) के संचालन एवं युवा कवि 'चेतन' नितिन खरे (सिचौरा, महोबा) के संयोजन में दादरी से आये कवि मुकेश दक्ष ने अपनी मधुर आवाज से माँ वाणी की आराधना की | काव्य पाठ के दौर में पहले कवि के रूप में कवि प्रभात परवाना (फरीदाबाद) ने अपने शानदार काव्य पाठ से श्रोताओं को अपने घरों के बाहर आकर कड़ाके की सर्दी में पंडाल के नीचे बैठने को मजबूर कर दिया | उनकी रचना- 'यदि देश बचाना है तो हमको भगत सिंह बनना होगा' को श्रोताओं ने बहुत सराहा | इसके पश्चात सिचौरा के ही जगभान सिंह ने जल संकट पर अपनी एक रचना का पाठ किया | कवि संगीताचार्य जगप्रसाद तिवारी ने जनता को जागरूक करने वाली कविता का पाठ किया | कवि संतोष पटैरिया (महोबा) ने बुन्देली बहार बिखेरी तो लखनऊ से पधारे युवा कवि कमल आग्नेय ने ओज की शशक्त रचनाओं का पाठ किया | कवि कमल आग्नेय ने कहा-

अगर बिल्लियाँ दो लड़ती हैं तो बंदर आ जाएगा,
आई एस आई एस मेरे भारत के अन्दर आ जाएगा,
को श्रोताओं ने खूब सराहा |

कवि मुकेश दक्ष (दादरी) ने कहा कि 'घोटाले तो याद रहे पर भारत माँ को भूल गये' |

हाथरस से आये लाफ्टर कवि सबरस मुरसानी ने घंटों श्रोताओं को लोट पोट कर दिया | कवि मुरसानी हँसाते हुए कहा कि- 'ऐ पाकिस्तान ! तू कुछ भी कर ले, अंत में मरेगा' | कवि अमित शर्मा (ग्रेटर नॉएडा) के काव्य पाठ के दौरान लोग लगातार तालियाँ बजाते रहने को मजबूर रहे | कवि अमित शर्मा की ऐतिहासिक प्रष्ठभूमि पर लिखी कविता को श्रोताओं का बहुत दुलार मिला | अआपने कहा-

"अंजाम गलत आता है तो, गलती शुरू की होती है,
शिष्य अगर नालायक हो तो गलती गुरु की होती है" |

मुंबई की कवियत्री ज्योति त्रिपाठी ने शानदार काव्य पाठ किया | आपकी 'सैनिक का सँवाद' कविता को श्रोताओं ने जमकर सराहा | कवियत्री ज्योति त्रिपाठी ने कहा कि-

'सीमा पर जाकर दुश्मन हित मुझे जलजला बनना है,
मेरी खातिर प्राणप्रिये अब तुम्हे उर्मिला बनना है"

कवयित्री दिव्या ज्योति (हरियाणा) की 'सैनिक की बेटी' वाली रचना को सुनकर हजारों आँखों से आँसू निकलने लगे | कवयित्री दिव्या ज्योति ने कहा-

खाक़ी वर्दी पहन गये थे, ओढ़ तिरंगा आये हैं,
पापा आये हैं, पापा आये हैं, पापा आये हैं'

सिचौरा महोबा के ही युवा कवि 'चेतन' नितिन खरे ने अपनी जन्मभूमि में अपनी ओजपूर्ण रचनाओं का पाठ करके सभी का ध्यान खींचा | कवि 'चेतन' खरे ने कहा-

गीता के उपदेशों वाला ज्ञान बदलकर रख डाला,
सारे चोर लुटेरों ने संविधान बदलकर रख डाला,
पैर काटकर लोकतंत्र के उसे अयोग्य बना डाला,
सात मिनट के अन्दर हर अपराधी योग्य बना डाला,

इन पंक्तियों को सुनते ही हजारों हाँथों ने दिल खोलकर तालियाँ बजायीं |

"कल्पतरु साहित्य सेवा सम्मान-२0१५" से अलंकृत युवा कवि गौरव चौहान ने एक के बाद एक शानदार ओजपूर्ण कविताओं का पाठ किया | कवि चौहान को श्रोताओं के अत्यंत अनुरोध पर कई कविताएँ सुनानी पड़ीं

"कल्पतरु साहित्य सेवा सम्मान-२0१५" से अलंकृत वरिष्ठ कवि रामकिशोर तिवारी (बाराबंकी) ने हल्दीघाटी के युद्ध पर अपनी कविता सुनाकर श्रोताओं के सामने उस युद्ध की जीवंत तस्वीरें खींच दीं | अंत में राष्ट्रीय व्यंग्य कवि राजेन्द्र राजा (दिल्ली) ने अपने अध्यक्षीय काव्य पाठ से समाज को सकारात्मक संदेश दिया | कवि राजेन्द्र राजा ने कहा-

'केंचुओं को साँप कहने का जमाना आ गया है,
हर किसी को आप कहने का जमाना आ गया है,
देखिये रिश्ते बदलते जा रहे हैं इस कदर,
अब गधों को बाप कहने का जमाना आ गया है'

अंत में महंत नरसिंहानन्द सरस्वती जी ने अपना आशीर्वाद दिया | महंत जी ने कहा कि कवियों की कलम को स्वतंत्रता पूर्वक निष्पक्ष लेखन करना चाहिए | यदि कवि और साहित्यकार ही सत्ता के चाटूकार हो जायेंगे तो देश के पतन को कौन बचाएगा, सिंहासन को गलती का एहसास कौन कराएगा | आपने बुन्देलखण्ड की ऐतिहासिक इमारतों व स्थलों की अनदेखी पर चिंता व्यक्त करते हुए, बढ़ती हुई जनसँख्या से होने वाले खतरे के प्रति भी लोगों को आगाह किया | इसके साथ ही आशीर्वाद प्रदाता के रूप में श्री सज्जनदास जी महाराज, बाबा परमेन्दर आर्य ( कार्यवाहक अध्यक्ष- हिन्दू स्वाभिमान), श्री सत्यनाम दास साहब उपस्थित रहे | प्रमुख समाजिक व्यक्ति नरेंद्र मिश्रा (महेवा, महोबा) के साथ साथ कई क्षेत्रीय हस्तियाँ एवं हजारों की संख्या में लोगों ने कवि सम्मेलन का आनन्द लिया |

By: 'चेतन' नितिन खरे

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