कटरा गाँव को सांसद जी गोद लिए है लेकिन आदर्श कुछ भी नहीं है !

कटरा गाँव को सांसद जी गोद लिए है लेकिन आदर्श कुछ भी नहीं है !

केंद्र में भाजपा की सरकार आई तो प्रधानमंत्री मोदी ने देश के गाँवो को बड़ा सपना दिखाया.उन्होंने अपने साथ-साथ सभी निर्वाचित सांसद को निर्वाचन क्षेत्र के दो गाँव गोद लेने की योजना बनाई.इस बहुउद्देशीय केन्द्रीय कार्यक्रम को 'आदर्श सांसद ग्राम योजना' कहा गया.भारत सरकार की ग्रामीण विकास मंत्रालय की अधिकारिक वेबसाइट में देश के सभी दूरस्थ गाँवो में ये सांसद आदर्श गाँव खरे मानकों के साथ चस्पा है.स्वयं पीएम मोदी ने काशी-बनारस के जैतापुर गाँव को गोद लिया है और उसका कायाकल्प भी किया.आज उस गाँव में गरीबों को सुन्दर आवास,बिजली,पानी,ईधन की सुविधा मुहैया कराई गई है यह अलग बात है कि काशी की मुसहर जाति की गरीब,दलित बस्ती में आज भी उजाला नहीं पहुंचा है.बड़े शोरगुल के साथ शुरू की गई इस योजना का आज शायद ही निर्वाचित सांसद पुरसाहाल ले रहे हो.सब कुछ कागज में चकमक है या बिलकुल भी नहीं है.यूपी बुन्देलखण्ड के चित्रकूट मंडल के जिला बाँदा की नरैनी तहसील के कालिंजर दुर्ग स्थित कटरा गाँव को चित्रकूट-बाँदा सांसद भैरोप्रसाद मिश्रा ने गोद लिया है.जिला मुख्यालय से 50 किलोमीटर दूर पन्ना-बाँदा हाइवे मार्ग में कटरा गाँव ऐतिहासिक स्थल है.इसके साथ ही वे कर्वी-चित्रकूट के हन्ना बिनैका गाँव को भी गोद लिए है.नरैनी के कटरा गाँव को इस मायने में भी महत्वपूर्ण समझा जा सकता है कि यदि इसको आदर्श गाँव में बदल दिया जाए तो पर्यटन की नजर से खाश चन्देल कालीन करीब हजार साल से पहले का निर्मित कालिंजर दुर्ग स्थानीय रहवासियों की आजीवका का केंद्र बन सकता है. सूत्र बतलाते है कि कालिंजर किले में 800 राजाओं की क्रीडास्थली रही है.इसमें चन्देल राजा विद्याधर,पृथ्वीराज चौहान,महमूद गजनी,बादशाह अखबर,औरंगजेब,शेरशाह सूरी,हुमांयू आदि अपना शौर्य दिखा सके लेकिन इस किले को जीत सिर्फ शेरशाह सूरी ही सका.यह उसके लिए इतना घातक साबित हुआ कि उसको अपने प्राण देकर इसकी कीमत चुकानी पड़ी.कटरा ग्राम पंचायत इस पहाड़ी किले की प्राचीर के नीचे बसी है.सांसद आदर्श गाँव में गोद लेते वक्त गाँव वालों ने सपना देखा था कि अब उनके भी दिन बहुर जायेंगे,अच्छे दिन आएंगे. बीजेपी की केंद्र सरकार को तीन साल होने को है लेकिन यह कटरा गाँव आज भी आदर्श नहीं बन सका है.इसकी सूरत देखकर आदर्श शब्द बौना साबित होता है.संवाददाता ने जब इस गाँव की नब्ज टटोली तो गाँव वालों ने मन का गुबार निकाल दिया.

कटरा में मूलभूत सुविधा का आभाव है- तीन हजार की आबादी वाले सांसद आदर्श गाँव कटरा में यूपी सरकार की तमाम योजना पंचायती राज के माध्यम से चलती है जैसे अन्य गाँव में.साथ में अब तो यह वीआईपी श्रेणी का आदर्श गाँव भी है! इस गाँव में विकास के नाम पर मुख्य मार्ग में सीसी सड़क,बिजली,आंशिक पानी,एक प्राथमिक,एक जूनियर स्कूल,पीएचसी और मानव संसाधन विकास मंत्रालय अधिकृत जन शिक्षण संस्थान की एक शाखा खुली है.जेएसएस का कार्यालय खुलते गाँव वालों ने नहीं देखा,इसका मकसद गाँव के किशोर-किशोरी को रोजगार उन्मुख प्रशिक्षण देना है.यहाँ कुल 1800 मतदाता ने इस यूपी चुनाव में मत डाला है.कुशवाहा बाहुल्य गाँव ने इस बार भी लोकसभा चुनाव की तरह अधिकतर संख्या में बीजेपी के नरैनी विधानसभा प्रत्याशी राजकरन कबीर को वोट किया है.गाँव में सोनकर,हरिजन,मुस्लिम जाति है.

सांसद भैरोप्रसाद के विकास कार्य- तीन साल हुआ सांसद जी को गाँव गोद लिए. इस बीच वे गाहे-बगाहे गाँव आये और वापस चले गए.आदर्श गाँव का बोर्ड भी गाँव में नहीं लगा है.उन्होंने तीन वर्ष में हाल ही में यूपी चुनाव को देखते हुए 10 बोर करवा दिए है लेकिन अभी उनसे पानी नहीं निकला है.चुनाव बाद आचार संहिता हटेगी तो शेष कार्य किया जायेगा.अपनी सांसद निधि से उन्होंने गाँव को आर्थिक मदद नहीं दी है ऐसा ही कुछ चित्रकूट के गोद लिए गाँव हन्ना बिनैका के साथ हुआ है.

बुजुर्ग महिला-पुरुष को नहीं मिलती वृद्धावस्था पेंशन- कटरा गाँव की रहने वाली विधवा मनकी कुशवाहा उम्र 65 वर्ष कहती है कि पति के मरे दो साल हो गए,एक बेटा आनंदी और बहु रेखा है.6 बीघा परती जमीन है,छोटे नाति का पेट पालने के लिए सयाना बेटा दिल्ली चला गया है.मुझे पेंशन नहीं मिलती,घर में शौचालय नहीं है,मनकी का कच्चा घर उसके अच्छे दिन की बात कहता है.गाँव के बेटालाल कुशवाहा उम्र 60 वर्ष ने बात करने पर बतलाया कि गाँव में 150 बुजुर्ग आज भी पेंशन से बेदखल है.आगे चलने पर इसी गाँव के बाबू बतलाते है मेरे तीन लड़के है.गाँव में रोजगार नहीं है तो पंजाब गए है ईट-भट्टे में काम करने,नहीं जायेंगे तो भोजन कौन देगा ? वे कहते है गाँव से लगभग 1000 युवा पलायन किया है जो काम की तलाश में बाहर ही रहता है,खेती में पूरा नहीं पड़ता. सिलबट्टे में टमाटर की चटनी पीस रही ग्राम प्रधान रामबहोरी को अपने अंदाज में तंज देते हुए 70 वर्षीय शांति कहती है 'भवनिया मर नहीं जात है' ! जब से जीता है कभी झाँकने नहीं आया.मेरे 6 लड़के है,दो बहु घर में है छोटे घर में सब कैसे रहे इसलिए बेटे परदेश गए है काम से.

शौचालय, बजबजाती सीसी सड़क,पलायन,जल संकट से निजात कैसे मिले-

रोजगार के आभाव में गाँव से हो रहा बेतहासा पलायन देखकर युवाओं के हाल को समझा जा सकता है.गाँव के उन्मेद कहते है गाँव में बरात घर नहीं है,शादी-ब्याह में सबको दिक्कत होती है.पहले सब आपस में सहयोग करते थे पर अब समय वैसा नहीं रहा.गाँव का सफाई कर्मी कभी आ जाये तो बड़ी बात है,आपके आने का संजोग है कि आज वो गाँव में है.किसानों के सामने सबसे अहम समस्या पानी की है,यहाँ की ज्यादातर खेती परती है,बारिश ही एकमात्र चारा है.वर्ष 2012 में इस गाँव में इस गाँव को 82 शौचालय स्वीकृत हुए थे जो कागज में बनकर रह गए.आज 3200 रूपये के शौचालय पर 12000 रूपये दिए जा रहे है बावजूद इसके गाँव में हर घर को शौचालय नहीं मिल सका है. इसकी जाँच मंडल आयुक्त के पास आज भी लंबित है.

कालिंजर को पर्यटन हब बना दे तो बदल सकती है कटरा की तस्वीर-

सांसद आदर्श गाँव कटरा को अगर रोजगार के लिए ही सही खजुराहो की द्रष्टि से पर्यटन हब में तब्दील कर दिया जावे तो यहाँ की तस्वीर बदल जाएगी.इस गाँव से लगे दुर्ग कालिंजर के चारों तरफ पर्यटन स्थल है मसलन चित्रकूट,पन्ना टाइगर रिजर्व,झाँसी दुर्ग और खजुराहो.नरैनी से कालिंजर-पन्ना मार्ग की जर्जर हालत बहुत कुछ बयान करती कि विदेशी तो छोड़िये गर स्थानीय लोग भी दुर्ग देखने आये तो उन्हें कमर के दर्द सहने को तैयार रहना चाहिए.साथ ही सुरक्षा की गारंटी.कालिंजर दुर्ग के ऊपर आपार हर्बल मेडसिन (दवा) उपलब्ध है जो ग्रामीण के लिए आजीवका का साधन बन सकती है.दुर्ग में स्थित प्राचीन नीलकंठ का मंदिर,कोटितीर्थ सहित तीन बड़े तालाब,मृग धारा,अन्य बर्बाद होते महल जो दस किलोमीटर के दायरे में फैले है ये सम्पदा कटरा की किस्मत बदलने को काफी है.पर न तो सपा-बसपा विधायकों ने और न अब गाँव को गोद लिए सांसद भैरोप्रसाद मिश्रा ने आबाद करने की जमीनी कवायद की है.

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By: आषीश सागर दीक्षित

Ashish Sagar Dixit

 

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