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(Article) बुन्देलखण्ड के हालात पर एक लेख (Bundelkhand Ke Halaat)

(Article) बुन्देलखण्ड के हालात पर एक लेख (Bundelkhand Ke Halaat)

Smart City project in Jhansi, will cost Rs 2,040 crore

smart-city-project-in-jhansi-will-cost-rs-2040-crore.jpgMaking Jhansi a smart city will be an uphill task for the authorities as unlike other cities of UP, it even lacks basic amenities.

Famous for warrior princes Rani Laxmi Bai and hockey legend Dhyan Chand, the historic city of Jhansi is set for a makeover as it has made it to the coveted list of smart cities.

UP Tourism to develop Uttar Pradesh 1st ropeway in Chitrakoot

up-tourism-to-develop-uttar-pradesh-1st-ropeway-in-vindhyachal-and-chitrakoot-img.jpgIn a first, the state will get two ropeways in the coming Navaratra — one at Vindhyachal, the famous temple of Goddess Durga, in Mirzapur district and the other at Chitrakoot, which had a close association with Lord Rama. Chief minister Aditya Nath Yogi is likely to inaugurate both the ropeways.

(Success Story) Farmer's son, Arvind Sahu from Hamirpur, cracks IIT-JEE; struggles to pay fees

success-story-farmers-son-arvind-sahu-from-hamirpur-cracks-iit-jee-img.jpgAfter loosing his father in 2013, Arvind Sahu could not concentrate on his studies as this came as a huge shock to him. At that time Arvind was just 14 years of age. He was supported by his elder brothers who ensured that he studied.

दमोह जिले मै दम तोड़ता बीड़ी उद्योग (Damoh Jile Mai Dam Todata Beedee Udyog)

दमोह जिले मै दम तोड़ता बीड़ी उद्योग

01.jpgश्रमिको के दमन की लंबी दास्तान

बीड़ी उद्योग दमोह जिले में दम तोड़ता जा रहा है मध्यप्रदेश शासन के वन-श्रम व सहकारिता विभागों के आला अफसरों से लेकर अदना कर्मचारियों की उद्योगपतियों से सांठगांठ इसका एक प्रमुख कारण है तो स्वयं सरकार द्वारा  बीड़ी उद्यम के लिए  अनुकूल परिस्थितियां न रहने देना, दूसरा मुख्य कारण है परिणाम यह है कि बीते वर्ष में 7 से ज्यादा बीड़ी कारखाने बंद

Bundelkhand farmer mines second ‘Kohinoor’ Diamond in Panna

dc-Cover-st7ic3nd5mj11eqa6muum6lv91-20170723023610.Medi.jpegA farmer in Madhya Pradesh’s backward Bundelkhand region has mined a diamond said to be “as bright as legendary Kohinoor”.

Suresh Yadav, 40, found the rare gem quality diamond while digging his field in Pati Krishan Kalyanpura in Panna district,known for rich diamond reserve, in Bundelkhand region last week.

(Article) विंध्य - बुन्देलखण्ड क्षेत्र को भविष्य मे पष्चाताप के लिये तैयार रहना होगा!

विंध्य - बुन्देलखण्ड क्षेत्र को भविष्य मे पष्चाताप के लिये तैयार रहना होगा !
 
वैसे तो पूरे देष का बुरा हाल है पर विंध्यक्षेत्र तथा बुन्देलखण्ड मे हर साल प्रकृति दिखा रही है कि हम गलत रास्ते पर हैं जिसे सही मानकर हम आगे बढ़ते ही जा रहे हैं। विकास के नाम पर जो रास्ता हमने चुना है वह हमे कहॉं ले जा रहा है इस तरफ देखने,  सोचने तथा समझने का न तो समाज के पास और न ही सरकारों के पास अवसर है और न धैर्य । 
 
मौसम अनिष्चित होता जा रहा है , जाड़ा, गर्मी , बरसात जो अभी पॉंच दषक पहले तक अपने निष्चित रंग और ढंग से आते थे ,तापक्रम मे बहुत उतार चढ़ाव नही रहता था , वर्षा की स्थिति: एक साल कम तथा दूसरे साल सामान्य या अधिक होना एक सदी से क्रमबद्ध चल रहा था । सूखे पडते थे पर बीस-पचीस सालों मे कहीं एक  या दो बार । 
 
फिर इन कुछ दषकों मे ऐसा क्या हुआ कि सब कुछ  अस्तव्यस्त और मनुष्य ही नही अपितु सभी जीवधारियों का जीवन पूरी तरह त्रस्त हो गया। स्थिति यह है कि जंगल , नदी,, पर्वत , जमीन , गांव , किसान, मजदूर, जंगली और पालतू जानवर सभी पर संकट के बादल मंड़रा रहे हैं । आज यहॉं सब ओर विनाष की झलक दिख रही है। जंगलों का सफाया, ग्रेनाइट, फर्सी  और चूना-पत्थरों तथा हीरा की विस्तृत खदानें, नदियों की गहन गहराइयों से बालू का दोहन और इस कार्य हेतु देषी तथा विदेषी निवेष की चेष्टा और आमंत्रण, उद्योगों के  विकास के नाम पर अनियंत्रित उत्खनन , अखबारों मे रोज छपती वैध-अवैध उत्खनन की रिपोर्टें,ं बढ़ती जा रही स्टोन-क्रषर्स की संख्या, ऊँचाई से भी अधिक गहराई तक कटते तथा खुदते हुये पहाड़, बरबाद होते हुये ऐतिहासिक तालाब तथा सरोवर, सूखती और प्रदूषित होती हुई सिंध, पहूज, धसान, बेतवा, केन, और चित्रकूट की मंदाकिनी जैसी पवित्र एवं निर्मल जलवाही नदियाँ, उस पर भी विनाषकारी केन -बेतवा गठजोड आदि को लेकर तथ्यों के साथ खिलवाड़ एवं झूठबयानी और गहराती जल-राजनीति, अभ्यारण्यो में भी वनराजों की हत्या और मौतें , भटकने और कटने के लिये बहिष्कृत अथवा बेची जाने वाली गोमातायें, बैलों को रौंदते हुये ट्रैक्टर्स, साल दर साल घटती हुई जमीन की ताकत, पैदावार मे अनिष्चितता, लुप्त होते हुये कालजयी बीज, रूठते बादल, सपरिवार पलायन के  लिये मजबूर लोग और किसानों की आत्महत्याओं के बढ़तें आंकड़े क्या समाज को या सरकारों को कुछ भी सोचने के लिये बाध्य नही करते । 
 
मौसम तथा पारिस्थितिकी के सर्वनाषी उतार चढ़ाव तथा जीवन के सामने आने वाले गम्भीर संकट को ग्लोबल वार्मिंग की आड़ मे ढकेला जा रहा है । अपने कुकृत्यों , स्वार्थपरक निर्णयों तथा उनसे होने वाले दुष्प्रभावों की ओर ऐसे ऑंख मूंूंदी जा रही है जैसे हम मनुष्य नही  षुतुर्मुर्ग की योनि मे जन्मे हों। 
 
वर्तमान स्थिति:                           
              विकास के नाम पर नगरीकरण और उद्योगों के फैलाव और अनियंत्रित उत्खनन के षिकार पर्वत तथा उनके ऊपर के जंगलों के विनाष ने एक ओर वर्षा को अस्तव्यस्त कर दिया है ,दूसरी ओर मैदानी जंगलों का सफाया भूगत जल के संभरण को पूरी तरह प्रभावित कर रहा है । जो भी वर्षा आज होती है वह बिना विराम जमीन पर की मिट्टी को बहाती हुई नदियों मे अधिक तेजी से चन्द दिनों के लिये भीषण बाढ़ लाती है , बाढ़ का फैलाव अब पहले की तरह खेतों मे उपजाऊ ह्यूमस न विखेर कर कई कई फिट बलुई धूल से भर देता है । इस पूरे क्षेत्र मे कुछ दषको पूर्व बारहमासी प्रवाहित सैकड़ों  नाले तथा उपनदियॉं अब अक्तूबर मे ही सूखने लगती हैं । मध्यम आकार की महत्वपूर्ण नदियॉं भी बंधे पानी के कुंडों मे सीमित हो रही है, प्रवाह बाधित हो रहा है ।  
 
सतही पानी अब ज्यादा समय नही ठहर पाता । उसके सूखने के साथ जिस तरह जमीन के अन्दर का पानी बाहर उलीचा जा रहा हैै परिणामतः भूगर्भ जल लगातार तेजी से नीचे जा रहा है । सैकड़ो वर्षों से गॉंव गॉंव फैले अपने सुदृढ़ कुंओ, बावड़ियों, सारोवरों तथा तालाबों के कारण अपनी विषिष्ट छवि वाला यह क्षेत्र आज बूंद बूंद पानी के लिये संघर्ष कर रहा है । गॉंव हों या नगर सभी स्थानों मे कुंये तथा तालाब मृतप्राय हैं , गर्मियों मे यहॉ पीने के पानी का प्रबन्ध भी मुष्किल हो  रहा है। पानी के साथ ही खेती जुड़ी है । इस क्षेत्र मे कम पानी मे खेती करने की परम्परा रही है , अनेक तरह के परम्परागत अनाज , तिलहन एवं  दलहन के स्थानीय बीज यहॉ उपलब्ध थे जिनके बल पर किसान विषम परिस्थिति मे भी उत्पादन लेते रहे । आज विकास की ऑंधी के तहत षंकरित/आयातित बीजों के लिये एक ओर क्षेत्रीय कालजयी बीजों को समाप्त कर दिया गया , सोयाबीन तथा मेंथा जैसी फसलों ने भोजन के लिये अत्यावष्यक दालों तथा उतम पोषणीयता के श्रोत मोटे अनाजों आदि को परम्परागत स्थानीय फसलों की सूची से हटा दिया  दूसरी ओर पानी की कमी , मिट्टी की उर्वरता, के ह्रास , मौसम की अनिष्चितता और नगरों के पास की उपजाऊ जमीनों का क्षेत्रफल लगातार घटने के कारण खेती पूरी तरह अस्त व्यस्त हो गयी। परिणामतः गरीबों का बड़े नगरों तथा दूसरे राज्यों की ओर पलायन तथा किसानों की आत्महत्या अब कोई आष्चर्यजनक या दुर्लभ समाचार नही रह गया है ।  
 
भावी दिषा
आज जो हो रहा है वह इस सम्पूर्ण क्षेत्र के जंगल’-जल-जमीन को तो  नष्ट करेगा ही , सॉंस लेने के लिये हवा में जरूरी आक्सीजन को भी नही बख्षेगा।  इन सबसे जो लाभान्वित होने वाले हैं ऐसे समाज के चन्द नेता, नौकरषाह, व्यापारी तथा टेक्नोकेट्स तो भविष्य मे दूर जा बसेंगे पर यहॉं का निरीह जनसमाज क्या भविष्य में बिना पानी और शुद्ध वायु ऑक्सीजन जिन्दा रह पायेगा ? क्या रसोई गैस की तरह सरकारें पानी के निःषुल्क ड्रमों  तथा ऑक्सीजन सिलिंडर के माध्यम से उन्हे जिन्दा रखेगी ? क्या इसी के बल पर यहॉं  की भावी सारी पीढ़ियां अपना जीवनयापन करेंगी ? 
 
समस्या यह है कि उपरोक्त स्थिति अविलंब नही बदली तो पूरे समाज के लिये पष्चाताप  करने के अतिरिक्त और कोई विकल्प नही होगा। वैसे तो हमारा समाज पाप करने और गंगा नहा कर उन्हे बहाने और पुण्य कमाने का आदी है ।  समस्या यह है अब गंगा भी उतनी पवित्र नही है कि ये सारे पाप धुल सकें। 
 
 
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संसाधन अध्ययन केन्द्र , छतरपुर म.प्र.

Bundelkhand Resources' Study Centre   

& Kisan Vigyan Kendra-Bundelkhand

केन बेतवा नदियों के घटजोड़ में एक विशाल जंगल खत्म हो जायेगा

 

* बुन्देलखण्ड क्षेत्र के यूपी.एमपी में प्रस्तावित केन.बेतवा नदी लिंक प्राकृतिक आपदा हैBundelkhand-water-crisis-1.jpg (768×576)

* केंद्र सरकार ने फारेस्ट एडवाइजरी कमेटी से वन्यभूमि अधिग्रहण करने की एनओसी प्राप्त की
* पर्यावरण मंत्रालय ने अभी मामले को उलझा रखा है उधर सुप्रीम कोर्ट अपनी निगरानी में टाइगर बफर जोन में बांध निर्माण की अनुमति देगी
 
25 अगस्त 2005 से प्रस्तावित केन .बेतवा नदी गठजोड़ मुद्दे पर केंद्र और दोनों राज्य सरकारे अभी तक स्थानीय आदिवासी बाशिंदों के साथ सहमती नही बना पाई हैण् 8500 आबादी वाले आदिवासी डूब क्षेत्र के दस गाँव में अपने हिसाब से मुंह माँगा मुआवजा चाहते है। जबकि केंद्र सरकार मध्यप्रदेश पुनर्वास स्कीम के तहत बीपीएल आदिवासी विस्थापन के आंकलन पर मुआवजा देने की बात कर रही है। बांध के केंद्र बिंदु ग्राम दोधन ;पन्ना टाइगर्सएतहसील बिजावरएजिला छतरपुर द्धएपिल्कोहा 50 लाख रूपये प्रति परिवार आर्थिक मदद चाहते है जबकि खरयानीएकूपीएमैनारी आदि 30 लाख रूपये की बात कह रहे है। सरकार न तो इतना मुआवजा देगी और न सहमती बन पायेगी। हाल .फिलहाल इस कार्यकाल में ये बांध बनता नही दिख रहा हैण्बीते 31 सितम्बर 2015 को केन्द्रीय जलमंत्री उमा भारती अवश्य अपने कैबनेट के साथ जंगल में बांध स्थल दौधन ग्राम में लाल पत्थर लगवाकर शिलान्यास कर आई है। बुंदेलखंड के लगातार पड़े तीन साल के सूखे ने केन नदी में गंगऊ डैम में भी पानी शेष नही छोड़ा है। बांध पर्यावरण प्रभाव आंकलन के अनुसारए 6 हजार हेक्टेयर में लगे लगभग 7 लाख पेड़ काटे जाएंगे। पर्यावरण मंत्रालय ने अभी मामले को उलझा रखा है उधर सुप्रीम कोर्ट अपनी निगरानी में टाइगर बफर जोन में बांध निर्माण की अनुमति देगीण् जंगल के आदिवासी कहते है उन्हें जंगल से प्यार हैए वे लोग जंगल की रक्षा करते हैं। उनका मानना है कि इस योजना से जंगल को नुकसान होगा। वे अपने पन्ना टाइगर्स के रहवास को छोड़ना नही चाहते मगर वीरान होते जंगल और खतम होते वन्य जीवो के प्रवास के बीच सबको अपने .अपने हिस्से की कुरबानी करनी ही होगी क्योकि केंद्र सरकार को केन की हत्या चाहिए। बुंदेलखंड के हमीरपुर और झाँसी के रहवासी केन के पानी को बेतवा में डालने का समर्थन करके अलगाववाद की मानसिकता से ग्रस्त है। नेता चाहते भी यही है कि आवाम आपस में एकजुट न होने पाए। उन्हें बाँदा के बाशिंदों का सूखा नही दिखता है ए न आदिवासी विस्थापन दिखता हैए न पन्ना नेशनल पार्क के उजाड़ने का दर्पण एन वन्यजीवो का पलायन निज स्वार्थ में सियासी बाँध है ये और बुंदेलखंड के ईको सिस्टम से मजाक भी। पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने अपने कार्यकाल में इस बांध को एनओसी नही दी थी तब उन्होंने पन्ना टाइगर्स के बड़े हिस्से को बांध एरिया में जाने पर सवाल किया था। सरकार ने जंगल में रहने वाले आदिवासियों को विकास का थोथा सब्जबाग दिखलाकर उन्हें भी मोबाइलएजींस और कंक्रीट के गलियारे में भटकने को रास्ता दिखला दिया है। देश की और बुंदेलखंड की प्रत्येक नदियाँ नैसर्गिक रूप से आपस में जुडी है फिर ये प्रकृति से खिलवाड़ क्यों घ् मानवीय अतिक्रमण क्यों घ् विकास के लिए जंगल के बाहर की जमीन क्या कम है घ् या धरती में अब सिर्फ आदमी ही रहना चाहता है घ्
 
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इस परियोजना से उजड़ जाएंगे कई गांव.
इस परियोजना के विरुद्ध उठ रहे विरोध के स्वरों के बीच बुन्देलखण्डण्इन संवाददाता ने नदी गठजोड़ मुद्दे पर गंभीरता से अध्ययन किया हैण् आंकलन के मुताबिक केंद्र सरकार बुंदेलखंड के गांवों और जंगलों को उजाड़ कर खेत सींचने की तैयारी कर रही हैए जिसके सफल होने की उम्मीद कम है। परियोजना में न सिर्फ पन्ना टाइगर नेशनल पार्क का 6 हजार 258 हेक्टेयर वन्य इलाका इस योजना में अधिग्रहित कर लिया जाएगाएबल्कि कई गांव भी उजड़ जाएंगे। नेशनल पार्क में कुल 24 बाघ हैं। पर्यावरण प्रभाव आंकलन के रिपोर्ट के मुताबिकए परियोजना के तहत आने वाले इलाके में जीव.जंतुओं की रिहाइश नहीं हैए लेकिन संवाददाता के अनुसार देश में बाघ बचाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैंए जबकि निश्चित रूप से बाघों का रिहाइशी इलाका प्रभावित होने के साथ ही दुनिया का बड़ा गिद्ध प्रजनन इलाका भी इस परियोजना के भेंट चढ़ेगा। सूचनाधिकार में केन्द्रीय जल संसाधन मंत्रालय वर्ष 2011 में कह चुका है कि बांध क्षेत्र के गाँव विस्थापित किये जा चुके है मगर असल में आज भी ये सभी गाँव जस की तस आबाद हैण्आदिवासी न जंगल छोड़ना चाहते है बिना उचित मुआवजे के और न बाँदा के लोग ये बांध के समर्थन में हैण्केन नदी के पानी को बेतवा में डालकर सियासत महज बुन्देली जनता को आपस में पानी की जंग के लिए मजबूर कर देगीण्ग्यारह साल में सरकार और आदिवासी के बीच नही बन पाई सहमती।
कांग्रेस और भाजपा केंद्र सरकार के साए में पिछले ग्यारह साल से लटका है केन .बेतवा नदी गठजोड़ उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के जिस इलाके को पानी से तरबतर कर देने का दंभ भर रहा है यह गठजोड़ जरा देखे केन नदी की तलहटी में बसे बांध के केंद्र बिंदु ;ग्रेटर गंगऊ डैमएग्राम दौधनएतहसील बिजावरद्ध जहाँ बाँध स्थल प्रस्तावित है उस गाँव में ही आज पेयजल का संकट हैण्इस पन्ना टाइगर्स डूब क्षेत्र के अन्दर आने वाले 6 गाँव के बीच दो कुयें है जिनमे पानी है। यहाँ आदिवासी रहवासी करीब 5 हजार से ऊपर कोंदर और गौड़ बसते हैण्इस जंगल में ही एक गाँव है पाठापुरा जहाँ तीन किलोमीटर दुर्गम घाटी से सुबह चार बजे नीचे आकर आदिवासी लड़कियां वापसी दोपहर बारह बजे तक पानी भरती है। वे स्कूल इसलिए नही जा पाती क्योकि उन्हें घर का पानी भरना होता है। आप विस्वास न करेंगे जिस घाटी में हम कैमरा लेकर न चढ़ पाए और गिरने का भय हो वहां ये लड़कियां कठपुतली की तरह तेज रफ्तार से ये काम बखूबी कर लेती है लेकिन इनका हुनर इनकी बेबसी की देन है जो उनको मजबूरी ने सिखलाया है। बिजावर के साथी अमित की माने तो ये बेटियां अपना दिन और रात पानी की दहशत में काट रही है। इन्हे ये डर लगता है कि डेरा में कोई बेटी न जन्मे बुंदेलखंड के लगातार पड़ रहे सूखे ने केन नदी का पानी बरियार पुर डैम और रनगवां के साथ गंगऊ में भी खतम कर दिया है। ग्राम दौधन का गंगऊ डैम साल 2015 में सूखा है और उससे जुड़ने वाले अन्य बांधो में भी पानी नही था। 24 मई 2017 को बांध क्षेत्र गंगऊ डैम पानी में नहीं है। विस्थापित होने वाले एमपी के छतरपुर जिले की बिजावर तहसील के गाँव मैनारीए कूपीए खरयानीए पलकोहाए दौधनए वसुधाए भोरखुहाए घुघरीए शाहपुराए सुकवाहा आदिवासी गाँव हैण् वही सरकार यह दावा कर रही है कि बाँध से 221 किण्मीण्लम्बी मुख्य नहर उत्तर प्रदेश के बरुआ सागर में जाकर मिलेगी इस नहर से 1074 एमण्सीण्एमण् पानी प्रति वर्ष भेजा जाएगा एजिसमेसे 659 एमण्सीण्एमण् पानी बेतवा नदी में पहुंचेगा।
ढोंडन बाँध के अलावा तीन और बाँध भी मध्य प्रदेश कि जमीन पर बेतवा नदी पर बनेंगे। रायसेनएविदिशा जिले में बनने वाले मकोडिया बाँध से 5685 हेक्टेयर क्षेत्र मेंए बरारी बेराजसे 2500 हेण्केसरी बेराज से 2880 हेण् क्षेत्र में सिंचाई होगी लिंक नहर से मार्गों में 60294 हेण् क्षेत्र सिंचित होगा एइसमे मध्यप्रदेश के 46599 हेण् उत्तर प्रदेश के 13695 हेण् क्षेत्र में सिचाई होगी। ढोंडन बाँध से छतरपुर और पन्ना जिले कि 3ण्23 लाख हेण्जमीन सिंचित होने का दावा भी किया जा रहा है ।
पानी की जंग के लिए तैयार हो रहे है बुंदेले. 
 
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24 मई को बांध क्षेत्र में दिल्ली से आये स्वामी आनंद स्वरुपए लखनऊ के आशीष तिवारीएअंशुमान दुबे ने बुन्देलखण्डण्इन  टीम के साथ यहाँ का भ्रमण किया हैण् आये हुए तीन साथी कहते है गत गर्मी की तरह आज भी यहाँ पानी का आकाल है ऐसा तब है जब बीते साल बारिश सही हुई हैण् क्या ऐसे में ये लिंक अपने डीपीआर रिपोर्ट पर ही सवाल नही खड़ा करता है कि उपरी हिस्से में बह रही पहाड़ी नदी केन बड़ी नदी बेतवा को पानी कैसे दे पायेगी घ् दो नदियों का नेचर अलग है और फिर हर नदी आपस में पहले से जुड़ी हैण्आज भी बरियारपुरएरनगवां बांध सूखे है क्या इस बांध परियोजना की डीपीआर बुन्देलखण्ड के पारिस्थितिकी तंत्र का इसका स्थलीय अध्ययन किया गया है घ् इस बात पर भोपाल के सामाजिक कार्यकर्ता अजय दुबे इस बांध के बन जाने से बाघों के विस्थापन से चिंतित नजर आते हैण्बकौल अजय मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज ने पन्ना टाईगर रिजर्व के 640 हेण् इलाके को डूबाने वाली और बाघों के लिये घातक केन.बेतवा लिंक परियोजना को अनुमति देकर प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाले राष्ट्रीय वन्य प्राणी बोर्ड को भेजा। वन अधिकार अधिनियम मान्यता कानून 2006 का कोई उपयोग नहीं कर रहा। इस पूरे प्रोजेक्ट में न आदिवासी किसानो को प्लानिंग में शामिल किया गया जिनके लिए ये स्कीम हैएन किसानो से पूछा गयाएन पर्यावरण कार्यकर्ता की मंशा को ध्यान में रखा गया है। केन्द्रीय जल मंत्री उमा भारती के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल ये लिंक फ़िलहाल तो महज वोट बैंक की खेती को काटने के लिए मोदी सरकार में 18 हजार करोड़ रूपये की होली जलाने का खाका लगता है फिर रुपया भी तो विश्व बैंक के कर्जे का कौन सा किसी राजनीतिक पार्टी की जेब से लगने जा रहा हैण् क्या इतने बड़े पर्यावरणीय हस्तक्षेप की जगह बुन्देलखण्ड को ठोस रोजगार का तोहफा नही दिया जा सकता था जिसकी यूपी.एमपी दोनों को दरकार है


BY: आशीष सागर

(Article) Soil Health Card – A tool for Agri revolution by Nirendra Dev

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Agriculture since ages is the mainstay of the Indian population. The story of Indian agriculture has been a spectacular one, with a global impact for its  multi- functional  success  in  generating  employment,  livelihood,  food,  nutritional  and ecological security. Agriculture and allied activities contribute  about 30 per cent to the gross  domestic product of India. The green revolution had heralded the first round  of  changes.  India  is  the  second  largest    producer  of  wheat,  rice,  sugar, groundnut as also in production of cash crops like coffee, coconut and tea.

India is now eyeing second Green Revolution in eastern India. The need for enhanced investment in agriculture with twin focus on higher quality productivity and welfare of farmers is rightly emphasized from  time to time by the Prime Minister Narendra Modi.

In the  entire  scenario,  importantly the Narendra  Modi  government  has  laid emphasis  on  the  awareness  campaign  and  enhanced  agri-knowledge  for  the farming community. But besides the measures to improve minimum support price and assistance like improved irrigation and rural electrification, the incumbent NDA regime has laid emphasis on the Soil Health Card Scheme.

Launched by the central government in February 2015, the scheme is tailor- made to issue ‘Soil card’ to farmers which will carry crop-wise recommendations of nutrients and fertilizers required for the individual farms. This is aimed to help farmers to improve productivity through judicious use of inputs.

In the words of the union Agriculture Minister Radha Mohan Singh, this path- breaking initiative would create a golden opportunity for the farmers to improve the productivity of their crops and also go for diversification. This will certainly contribute significantly to ensuring food security of the country.

Awareness of soil health position and the role of manures would help in higher production of foodgrains in eastern India too and this would help tackle the decline in production in central and peninsular India. The growth in foodgrains, rice and wheat, from eastern India would provide an opportunity to procure and create

foodgrain reserves locally. This would reduce the agricultural pressure on Punjab and Haryana as well.

Essentially, the Soil Health Card scheme is modeled on a successful programme launched by Prime Minister Modi during his tenure as Chief Minister of Gujarat.

In fact from 2003-04 itself, Gujarat has been the first state to introduce Soil Health cards, according to government sources, to initiate the scientific measures for Soil Health care. In Gujarat, over 100 soil laboratories  were set up and the result of scheme was found quite satisfactory. To start with, the agriculture income of Gujarat from Rs 14000 crore in 2000-01 had gone up to staggeringly high Rs 80,000 crore in 2010-11.

In July 2015, the union Agriculture Minister Radha Mohan Singh said that for the first time, a massive agricultural population of 14 crore card holdings will be covered once in a cycle of 3 years to promote soil  management practices and restore soil health.

To state a truism, this is a timely intervention as aggressive farming coupled with absence of any concrete step to bring new lands under cultivation has already affected yields and deprived farmlands of valuable  nutrients.  Experts and agri scientists have often said that a likely famine and drought stare various parts of India.

Thus it goes without saying that if necessary corrective steps are not taken, there could be food shortage in next 10 years time span.

Experts also talk about the importance of genetic food cultivation calling for lot more variety in the land. The  Agriculture ministry maintains that the emphasis should be to develop more and more pulses and green vegetables as this can bring in inherent resilience in the land. According to renowned expert and the ‘father of Green Revolution’, M S Swaminathan, there is need to opt for wide range of crops cultivation.  The  awareness  of  soil  health  conditions  would  only  make  these operations easier and more result oriented. The studies of soil across the states also show that there’s need to promote alternate crops like pulses, sunflower, bajra, or fodder and vegetables.

Thus we realize that the Soil Health Card mechanism definitely aims to help herald  some  essential  revolutionary  changes  and  salutary  effect  in  country’s agricultural scene. There are actually many  path-breaking initiatives associated with the scheme.  Under  this,  the  government  can  help  farmers  adopt  crop diversification. Farmers would understand the fertility factor of the land better and can be attracted towards value added newer crops. This would help reduction in risk in farming and also the cost of overall cultivation process would get reduced.

Some states are already issuing Soil Health Cards but, it was found that, there was no uniform norm for sampling, testing and distribution of Soil Health Cards across the states. Taking a holistic view on these, the central government has thus rightly taken measures like launching of a Soil Health Card portal. This would be useful for registration of soil samples, recording test results of soil samples and generation of Soil Health Card (SHC) along with Fertilizer Recommendations.

“This is  a  single,  generic,  uniform,  web  based  software  accessed  at  the link www.soilhealth.dac.gov.in,”  the  Agriculture  Minister  Radha  Mohan  Singh said on the completion of one-year of office of the Modi government in May 2015.

The official sources in the Agriculture ministry say that the Soil Health Card portal aims to generate and issue Soil Health Cards based on either Soil Test-Crop Response (STCR)formulae developed by ICAR or General Fertilizer Recommendations provided by state Governments.

The scheme has been approved for implementation during 12th Plan with an outlay of Rs.568.54 crore.  For the current year (2015-16) an allocation of Rs.96.46 crore – only for the central government share-has been made.  The scheme is to be otherwise implemented on 50:50 sharing pattern between Government of India and state Governments.

In order to improve quality of soil and ultimately for better nutrient values and higher yields, experts say while at present, general fertilizer recommendations are followed by farmers for primary nutrients, the secondary and micro nutrients are often overlooked. “We have often come across deficiency of nutrients like Sulphur, Zinc and Boron. This has become a limiting factor in increasing food productivity. The Soil Health Card scheme will address these,” says Agriculture Radha Mohan Singh.

The government is effectively marching in quite ambitiously for a grand success of the Soil Health Card  scheme and proposes to ensure that all farmers in the country have their respective Soil Health Cards by the year 2017. In the first year of NDA regime 2014-15, a sum of Rs 27 crore was sanctioned and in 2015-16, there is an allocation of Rs 100 crore to all the states to prepare soil health cards.

 

By: Nirendra Dev is a Delhi based journalist

DAMOH : Railway Time Table

 

Train Time Table

Updated on 04-02-2017

TRAINS PASSING THROUGH DISTRICT DAMOH (M.P.)

TOWARDS BINA

Train No.

Arrival

Departure

Train Name

Days

12186

00:18

00:20

REWA-HABIBGANJ (BHOPAL) : REWANCHAL EXPRESS

DAILY

18477

00:28

00:30

PURI-HARIDWAR : UTKAL EXPRESS (VIA MALKHEDI)

DAILY

11271

01:40

01:45

ITARSI BHOPAL : VINDHYACHAL EXPRESS

DAILY

11072

02:05

02:10

VARANASI-LOKMANYA TILAK : KAMAYANI EXPRESS

DAILY

14710

02:28

02:30

PURI-BIKANER EXPRESS

THU

18213

02:28

02:30

DURG-JAIPUR  EXPRESS

MON

18573

02:28

02:30

VISHAKAPATNAM-BHAGAT KI KOTHI EXPRESS (VIA MALKHEDI)

FRI

18507

02:28

02:30

VISHAKAPATNAM–AMRITSAR : HIRAKUD EXPRESS (VIA MALKHEDI)

WED, SAT, SUN

18207

02:36

02:38

DURG-AJMER EXPRESS

TUE

19422

03:10

03:12

PATNA-AHMEDABAD EXPRESS 

WED

11703

03:46

03:48

REWA - INDORE : INTERCITY EXPRESS

MON,WED,FRI

22162

--

05:00

DAMOH-BHOPAL : RAJYARANI EXPRESS

DAILY

51886

--

05:45

DAMOH-BINA PASSENGER

DAILY

11701

08:08

08:10

JABALPUR-INDORE : INTERCITY EXPRESS  (VIA MALKHEDI)

MON, THU, SAT

11449

09:43

09:45

JABALPUR- JAMMU TABI EXPRESS (VIA MALKHEDI)

TUE

18236

09:48

09:50

BILASPUR-BHOPAL EXPRESS CUM PASSENGER

DAILY

13025

13:08

13:10

HOWRAH-BHOPAL EXPRESS

TUE

19607

13:08

13:10

KOLKATA-AJMER EXPRESS (VIA MALKHEDI)

FRI

18009

13:08

13:10

SANTRAGACHI-AJMER EXPRESS

SAT

19414

13:08

13:10

KOLKATA-AHMEDABAD EXPRESS (VIA BHOPAL-RATLAM)

SUN

11466

13:18

13:20

JABALPUR- SOMNATH EXPRESS

MON, SAT

22912

15:00

15:05

HOWRAH-INDORE : SHIPRA EXPRESS

TUE, FRI, SUN

19659

15:48

15:50

SHALIMAR- UDAIPUR EXPRESS (VIA MALKHEDI)

MON

22830

15:48

15:50

SHALIMAR-BHUJ EXPRESS

SUN

51614

17:18

17:20

KATNI-KOTA PASSENGER 

DAILY

22181

18:03

18:05

JABALPUR-NIZAMUDDIN EXPRESS (VIA MALKHEDI)

DAILY

18215

19:28

19:30

DURG- JAMMU TAWI EXPRESS (VIA MALKHEDI)

WED

51604

19:53

19:55

KATNI-BINA PASSENGER

DAILY

12121

22:08

22:10

JABALPUR-NIZAMUDDIN : M.P.SAMPARK KRANTI EXPRESS (MALKHEDI)

WED, FRI, SUN

51602

22:55

23:00

KATNI- BINA PASSENGER      

DAILY

12181

23:22

23:25

JABALPUR-AJMER : DAYODAYA EXPRESS  (VIA MALKHEDI)

DAILY

 
 

TOWARDS KATNI

 

Train No.

Arrival

Departure

Train Name

Days

11272

00:10

00:20

BHOPAL- ITARSI : VINDHYACHAL EXPRESS

DAILY

18478

00:53

00:55

HARIDWAR-PURI : UTKAL EXPRESS (VIA KATNI MURWARA)

DAILY

12185

02:50

02:52

HABIBGANJ(BHOPAL)- REWA : REWANCHAL EXPRESS

DAILY

11450

02:20

02:25

JAMMU TABI -JABALPUR EXPRESS

FRI

12122

03:53

03:55

NIZAMUDDIN-JABALPUR M.P.SAMPARK KRANTI EXPRESS

TUE, FRI, SUN

22182

04:50

04:52

NIZAMUDDIN -JABALPUR EXPRESS

DAILY

12182

05:16

05:18

AJMER- JABALPUR : DAYODAYA EXPRESS

DAILY

11704

07:16

07:18

INDORE-REWA EXP : INTERCITY

TUE, THU, SAT

18216

07:39

07:41

JAMMU TAWI-DURG EXPRESS (VIA KATNI MURWARA)

SAT

11071

07:57

07:59

LOKMANYA TILAK -VARANASI : KAMAYANI EXPRESS

DAILY

51613

08:13

08:15

KOTA-KATNI PASSENGER

DAILY

22911

08:57

09:00

INDORE-HOWRAH : SHIPRA EXPRESS

WED, FRI, SUN

18208

10:28

10:30

AJMER-DURG  EXPRESS (VIA KATNI MURWARA)

WED

18214

10:29

10:31

JAIPUR-DURG  EXPRESS (VIA KATNI MURWARA)

TUE

18574

10:29

10:31

BHAGAT KI KOTHI- VISHAKAPATNAM EXPRESS (VIA KATNI MURWARA)

SUN

51601

11:40

11:45

BINA-KATNI PASSENGER                                  

DAILY

18010

12:13

12:15

AJMER- SANTRAGACHI EXPRESS (VIA KATNI MURWARA)

MON

19608

12:13

12:15

AJMER-KOLKATA EXPRESS (VIA KATNI MURWARA)

TUE

13026

12:13

12:15

BHOPAL- HOWRAH EXPRESS (VIA KATNI MURWARA)

WED

19413

12:13

12:15

AHEMDABAD- KOLKATA EXPRESS  (VIA KATNI MURWARA)

THURSDAY

19660

12:13

12:15

UDAIPUR- SHALIMAR EXPRESS (VIA KATNI MURWARA)

SAT

14709

12:36

12:38

BIKANER-PURI EXPRESS (VIA KATNI MURWARA)

MON

11465

13:45

13:50

SOMNATH-JABALPUR EXPRESS

SUN, TUE

22829

13:58

14:00

BHUJ-SHALIMAR EXPRESS (VIA KATNI MURWARA)

WED

19421

14:03

14:05

AHMEDABAD-PATNA EXPRESS

MON

11702

15:18

15:20

INDORE-JABALPUR : INTERCITY

SUN, TUE, FRI

18235

15:30

15:35

BHOPAL-BILASPUR EXPRESS CUM PASSENGER (VIA KATNI MURWARA)

DAILY

51603

17:50

17:55

BINA-KATNI PASSENGER

DAILY

18508

19:48

19:50

AMRITSAR-VISHAKAPATNAM : HIRAKUD EXPRESS (VIA KATNI MURWARA)

MON, THUR, SUN

51885

22:20

--

BINA- DAMOH PASSENGER

DAILY

22161

22:45

--

BHOPAL-DAMOH : RAJYARANI EXPRESS

DAILY

 

Courtesy :  Indian Railway

Rajkiya Engineering College, Banda : FACULTY JOBS

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Patanjali will invest 500cr in Jhansi Food Park

झाँसी की बेटी ने महिला लोको पायलट बनकर लहराया परचम (Jhansi Women Becomes Loco Pilot)

water crises1

South Central Railway  के विजयवाड़ा मंडल में महिला लोको पायलट ने लहराया परचम.

इनके बारे में कहा जाता है की ।

बुंदेलखंड में जल कुंड और जल धारा से प्यास बुझाने को मजबूर लोग

Bundelkhand-water-crisis-1.jpg (768×576)वो 2013 का साल था , मध्य प्रदेश का बुंदेलखंड इलाका भी चुनावी रंग में रंगा हुआ था | इस  चुनाव के प्रचार के दौरान  मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री शिवराज सिंह  जगह जगह  मंच से  लोगों को और  महिलाओं को विकाश के सपने दिखा  रहे थे | उन्ही स्वप्नों में उन्होंने बुंदेलखंड की महिलाओ को एक सपना जल का भी दिखाया था | " अब हमारी माताओ और बहनो को पानी

UP Board Vigyapti for Corrected Syllabus 2017-18

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Rajkiya Engineering College, Banda

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